तकवीۃ ईमान नामक किताब जिसे मौलवी रशीद अहमद गंगोही ने घरों में रखना और उसे पढ़ना सही इस्लाम करार दिया है दरअसल यह किताब इस्माइल कील गड्ढे हुए विश्वासों का संयोजन है जो इस्माइल कील कुरान ोअहादीत के ऐसे ऐसे अर्थ व मफ़हूम निकाले हैं जिनकी ज़दमें आम मुसलमान ही नहीं बल्कि खुद नबी करीमﷺ और उनके साथियों स ालरज़वान भी आ जाते हैं, और इस्माइल देहलवी की सच्चाई खुलकर सामने आ जाती है कि उसके अर्थ व मफ़हूम बिल्कुल गलत और झूठे हैं क्योंकि उसने कुरान महान हदीस पाक जो अर्थ ोमिनी निकाले वह कभी किसी सहाबी किसी महदीत किसी मुफ़स्सिर और न ही किसी बुज़ुर्गों धर्म और अल्लाह के वली ने न बताए मतलब इस्माइल कतील के मानने वालों की नज़र में सभी सहाबा स ालरज़वान, मोहद्देसीन, टिप्पणीकारों, बुज़ुर्गों धर्म और औलिया अल्लाह की पार्टी ने कभी कुरान महान और देखें रसूलुल्लाह (स.अ.व.) को न समझा बस यही एक इस्माइल क़तील 1856 में बनाया गया जिसे सब ज्ञान प्राप्त हो गया। और उसका सबूत हम पहले से ही पिछले सिलसिला नंबरों में पेश किया कि कैसे इस्माइल क़तील सिद्धांत और रसूल पाक स.अ.व., सहाबा स ालरज़वान अल्लाह ाजमझीन और बुज़ुर्गों धर्म के सिद्धांत में विरोधाभास पाया जाता है।
अब हम तफवीۃ ईमान पुस्तक केवल एक पाठ जिसमें इस्माइल क़तील ने लिखा '' जिसका नाम मोहम्मद ीाली है वह किसी चीज़ का मालिक ोमखतार नहीं है '' इसका संचालन कर रहे हैं और इंशा अल्लाह ऊंचा इस पुस्तक का पूरा ऑपरेशन भी किया होगा .लेकिन पहले हम इसी इबारत (जिसका नाम मोहम्मद ीाली है वह किसी चीज़ का मालिक ोमखतार नहीं है) के अस्वीकार में एक और हदीस पाक जाते हैं।
'' हज़रत अब्दुल्ला बिन फज़ालह आरए अपने पिता श्री से रिवायत करते हैं उन्होंने फर माया कि रसूलुल्लाह (स.अ.व.) ने मुझे जो शिक्षा दी, उसमें यह भी इरशाद फर माया कि पांचों प्रार्थना की रक्षा करना, मैं ने पूछा यारसोल अल्लाह (स.अ.व.) प्रार्थना समय तो मैं बहुत विचलित हो जाता हूँ लिहाज़ा आप (स.अ.व.) मुझे कोई ऐसा आदेश इरशाद फर माताओं कि वह मेरे लिए पर्याप्त हो जाए तो आप ने फर माया चलो अस्र येन नमाज़ फजराोर अस्र की रक्षा कर लिया करोरावी कहते हैं कि हमारे शब्दकोश में िसरीन शब्द न हैं था मैंने कहा की िसरीन क्या है? आप ने फर माया सूरज उगता और सूर्यास्त से पहले दोनों नमाज़ें.ीिनी सुबह और अस्र। (अबु दाऊद सी 1, पी: 67)
इस हदीस भी इस्माइल कतील की इस इबारत प्रशस्त साफ खारिज कर दिया कि '' जिसका नाम मोहम्मद ीाली है वह किसी चीज़ का मालिक ोमखतार नहीं है '' जबकि हर मुसलमान मरदोिर और बूढ़े ोबचह सभी जानते हैं कि मुसलमानों में पांच नमाज़ें कर्तव्य हुईं न उनमें कमी हो सकती है न दुर्व्यवहार .इसलिए हर मुसलमान को पांच ही नमाज़ें चुकानी पड़ेंगी। लेकिन बलिदान जाएं हबीब परवरदिगार आलम के मालिक ोमखतार श्री अहमद मुजतबा (स.अ.व.) के विकल्प पर कि पांच प्रार्थना में भी उतार-चढ़ाव का अधिकार रखते हैं । जबकि इस्माइली कपटी ने हदीसों इनकार करते हुए केवल इस्माइल कतील की शिक्षाओं को आम करने में ही अपना जीवन गज़ारदी और उनके दूसरे मौलवी ने तो इस किताब रखना और पढ़ना सही इस्लाम घोषित कर दिया मतलब जिस किताब ने इस्लाम के अर्थ व मफ़हूम को ही बद लिमिटेड रख दिया उसे अपने इस्माइली कपटी ने ऐन इस्लाम घोषित

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